मत पूछो दोस्तों ये इश्क़ कैसा होता है,जो रुलाता है नाउसके ही गले लग के रोने को जी चाहता है…
जब देखोगे अपने महबूब को किसी और की बाहों में
बोलने लग जायेंगे तो धज्जियां उड़ जायेगी।।
आशा: सकारात्मक सोच को बढ़ावा देने वाले अल्फ़ाज़।
हमसे जलने वालों की अब खैर नहीं,क्योंकि अब हम खुद की तारीफ़ करना सीख गए हैं।
“तू पूछ ले दिल से, कि तेरे बिना क्या हाल है,
तेरे ख्यालों में खोकर हमने खुद को ही भुला दिया,
आपकी आँखों में सजे है जो भी सपने,और दिल में छुपी है जो भी अभिलाषाएं!
बस बचपन की जिद्द समझौतों में बदल जाती हैं
बेशकीमती ख़ज़ाने कभी किनारे पर नहीं मिला करते
तब पता चलेगा बेवफाई में माफी क्यों नहीं होती..!!!
कोई पूछें कैसे मरा तो मज़बूरी मोहब्बत की बता HINDI SHAYARI देना
रास्ते खुद निकल आते हैं साथ चलने के लिए।
खुद को इतना भी रोकूँ मोहब्बत बढती जाती है,